महाराष्ट्रराजनीति

सर्वोच्च न्यायालय के सख्त रुख से कैबिनेट विस्तार फिर टला, 8अगस्त के बाद ही संभव है कैबिनेट विस्तार ,न्यायालय के रुख से शिवसैनिकों ने ली राहत की सांस, बागी विधायकों में बढ़ी बेचैनी

नई दिल्ली (महानगर संवाददाता) महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे- फडणवीस सरकार की कैबिनेट विस्तार सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के कारण एक बार फिर खटाई में पड़ गया है। विगत बुधवार तथा गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सी वी रमन ने शिंदे गुट के वकील को साफ तौर से कहा था कि ‘हमने सुनवाई 10 दिनों के लिए क्या टाली आपने तो सरकार ही बना ली” सुप्रीम कोर्ट के इस तल्ख लहजे से जिस तरह महाराष्ट्र में नई सरकार का गठन हुआ है उससे ठीक संदेश नहीं गया है। इससे अब माना जा रहा है कि महाराष्ट्र में कैबिनेट का विस्तार कोर्ट के फैसले के बाद ही लिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देश के चुनाव आयोग से कहा है कि बागी विधायकों द्वारा दिए गए आवेदन में जो दावा किया गया है कि असली शिवसेना वही है तब तक कोई फैसला न करें जब तक शीर्ष अदालत का कोई फैसला नहीं आ जाता है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद हुए घटनाक्रम को देखते हुए उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी अपने सभी ने कार्यक्रम को रद्द कर गुरुवार को दिल्ली के लिए रवाना हो गए। सूत्रों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के अब तक के रुख को देखते हुए बीजेपी ने बैकअप प्लान पर अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इसके तहत देवेंद्र दिल्ली में केंद्रीय मंत्री अमित शाह व पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ चर्चा करेंगे। बीजेपी को लगता है कि अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला शिंदे सरकार के खिलाफ जाता है तो उनके पास आगे की प्लानिंग पहले से ही तैयार होनी चाहिए। वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अचानक अपने सभी प्रशासनिक कार्यक्रमों को रद्द कर दिया। बताया गया कि लगातार मीटिंग हवाई यात्रा की वजह से शिंदे थक गए हैं ऐसे में डॉक्टरों ने उन्हें आराम की सलाह दी है। हालांकि जानकारों का कहना है कि शिंदे गुट के 40 बागी विधायकों का भारी दबाव है। इन विधायकों को लग रहा था कि नई सरकार में सब कुछ आसान रहेगा और वे आसानी से मंत्री बन जाएंगे, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के कड़े रुख के मद्देनजर यह राह आसान अब दिखाई नहीं दे रही है। यही वजह है कि फडणवीस अकेले दिल्ली रवाना हुए। बागी विधायकों के मन में अब सवाल उठने लगे हैं कि जिस प्रकार सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है उससे बागियों में भय का माहौल है उन्हें लग रहा है कि अगर शीर्ष अदालत का फैसला उनके विरुद्ध जाता है तो उनके हालात न घर के न घाट के वाली जैसी स्थिति में हो जाएगी। अब सभी की निगाहें आगामी 8 अगस्त को होने वाले सुनवाई पर लगी हुई है कि सर्वोच्च न्यायालय क्या फैसला सुनाती है? वैसे महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में राजनीतिक असमंजस की स्थिति बने रहना प्रजातंत्र के लिए अच्छी बात नहीं है।

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