महाराष्ट्रराजनीति

असगर अली यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ना मिलते तो क्या विधायक नरेंद्र मेहता उनकी जमीन वापस करते?

प्रधानमंत्री का खौफ और जांच एजेंसियों का भय के कारण मेहता ने किया वोहरा के सामने सरेंडर

  1. मुंबई (महानगर समाचार संवाददाता) महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मीरा भयंदर के भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता इन दिनों मीडिया समाचारों के सुर्खियों में बने हुए हैं। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन के दोस्त तथा गुजरात के बड़नगर के बी एन हाईस्कूल में सहपाठी रहे असगर अली वोहरा ने विगत 8 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री से मिलकर भायंदर पूर्व के उनके द्वारा खरीदे गए 1989 में रजिस्टर्ड एग्रीमेंट द्वारा 2810 चौ मी जमीन खरीदा था। जिस पर भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता की कंपनी 711 कंस्ट्रक्शन कंपनी तथा स्वयं बिल्डर द्वारा 2011 में अवैध रूप से कब्जा करने की शिकायत की।
    प्रधानमंत्री के साथ असगर अली वोहरा की मुलाकात का फोटो जैसे ही सोशल मीडिया में वायरल हुई महाराष्ट्र के शासन प्रशासन हरकत में आई और 15 सितंबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के प्रधान सचिव श्रीकर परदेसी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई जिसमें मीरा भयंदर के मनपा आयुक्त राधा विनोद शर्मा, विधायक नरेंद्र मेहता, नगर रचना विभाग के सहायक संचालक पुरुषोत्तम शिंदे और असगर अली बोहरा शामिल हुए । बैठक के एक दिन बाद 16 सितंबर 2026 को विधायक नरेंद्र मेहता की कंपनी सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन कंपनी ने विवादित जमीन से कब्जा छोड़ने, निर्माण अनुमति वापस लेने तथा असगर अली के खिलाफ दर्ज पुरानी शिकायत को भी वापस लेने का औपचारिक ऐलान किया। ।
    गौरतलब हो कि विधायक नरेंद्र मेहता द्वारा विवादित जमीन से कब्जा छोड़ने के बाद अभी असगर अली को आधा न्याय 1405 चौरस मीटर जमीन पर न्याय मिला है। अभी आधी जमीन स्वयं बिल्डर द्वारा कब्जा नहीं छोड़ा गया है। जिसका मामला न्यायालय के विचाराधीन है। वैसे नरेंद्र मेहता ने कहा है कि उन्होंने कोई अवैध कब्जा नहीं किया था, उन्होंने आधी जमीन मार्विन फर्नाड़ी से खरीदी थी, वह भी तब खरीदी थी जब 2014 में कोर्ट का आर्डर आया कि मार्विन फर्नांडिस का संपूर्ण जमीन में आधा हिस्से का मालिकाना हक बनता है।
    अब सवाल यह है कि यदि भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता की बातों पर यकीन किया जाए तो फिर उन्होंने कब्ज तो 2011 से जमाए बैठे थे तो असगर अली बोहरा द्वारा प्रधानमंत्री से मिलने के बाद विगत 16 सितंबर 2026 को ही क्यों कब्ज़ा वापस करने की बात की। यदि उन्होंने नियम कानून के तहत सौदा किया था तो वापस करने का सवाल ही नहीं बनता। कहीं ना कहीं कुछ दाल में काला जरूर रहा होगा या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का खौफ तथा जांच एजेंसियों का भय तो कहीं मेहता को असगर अली बोहरा के सामने सरेंडर करने को मजबूर तो नहीं किया क्योंकि जो व्यक्ति 2011 से 15 वर्षों तक विभिन्न ऑफिसों, पुलिस, मनपा, न्यायालय का चक्कर लगा रहा था उसे मोदी से मिलते ही आधा न्याय मिल जाएगा यह तो प्रधानमंत्री के दमदार तेवर का नतीजा माना जाएगा । बहरहाल अब देखना यह है कि असगर अली को पूरा न्याय कब मिलेगा?
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