महाराष्ट्रराजनीति
भाजपा को मिला प्रचंड बहुमत पत्रकारों के लिए बना घमंड
पत्रकारों को लाइव प्रसारण करने से रोका गया

- भयंदर( महानगर संवाददाता) महाराष्ट्र में महानगरपालिका के चुनाव में मीरा भयंदर महानगरपालिका में भाजपा को जनता ने प्रचंड बहुमत से जीतांते हुए उनके 78 नगर सेवकों को मनपा में भेजा।भाजपा को जनता द्वारा प्रचंड बहुमतों से जिताना अब भाजपा इसे घमंड के रूप में लेकरअपनी पहली महासभा में ही जनता को गिफ्ट के रूप में 60 प्रतिशत टैक्स बढ़ाकर जनता को सताया,अब जनता सोच रही है हमने जिसे जिताया वही हमारी आर्थिक बोझ बढ़ाकर कमर तोड़ने का काम किया।जनता के बाद प्रचंड बहुमत का घमंड आज पत्रकारों को महासभा की कार्यवाही का लाइव प्रसारण रोक कर यह एहसास दिला दिया कि आने वाले दिनों में मीरा भयंदर की जनता का भविष्य अच्छा नहीं होगा। मीरा भयंदर महासभा का पत्रकारों द्वारा प्रसारण रोकना शायद यह देश का पहला तुगलकी फरमान होगा। जब देश की सर्वोच्च ससद लोकसभा, राज्यसभा, राज्य की विधानसभा, विधान परिषद का लाइव प्रसारण होता है और बकायदे पत्रकारों को संसद सत्र तथा विधानसभा सत्र का समाचार संकलन करने की आजादी मिली हुई है तो इस आजादी पर मीरा भयंदर महानगरपालिका में सत्ताधारी भाजपा ने आज पत्रकारों पर लाइव पर अंकुश क्यों लगाया। यह एक गंभीर और बहस का मुद्दा है। सत्ताधारी भाजपा पत्रकारों से मीरा भयंदर की जनता से क्या छिपाना चाहती थी जो आज लाइव प्रसारण पर रोक लगाई। विगत 18 फरवरी को पहले महासभा में 60% प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ाने के मुद्दे पर सत्ताधारी भाजपा के ही नगर सेविका नीला संस ने जिस प्रकार तीव्र मुखर होकर इस टैक्स के बढ़े हुए मुद्दे को उठाया उससे सत्ता पक्ष की काफी किरकिरी हो रही थी। क्योंकि नीला संस को प्रॉपर्टी टैक्स पर विरोध करना मीडिया ने इसे बड़े प्रमुखता से उनकी बातों को जनता तक पहुंचाया यह बात भाजपा को बुरी लगी। शायद इसीलिए आज पत्रकारों को लाइव प्रसारण पर रोक लगाकर देश के चौथे स्तंभ को कुचलना का कार्य किया गया जिसकी चाहे जितना भी निंदा की जाए कम है। सत्ताधारी भाजपा के दो दिनों के महासभा में लिए गए दो निर्णयों से यह जग जाहिर हो गया कि आने वाले दिनों में भाजपा को जो जनता ने प्रचंड बहुमत से जिताया है भाजपा उसको शालीनता की जगह घमंड के रूप में इस्तेमाल कर रही है। जो स्वस्थ प्रजातंत्र के लिए ञ्जनता के लिए और स्वयं भाजपा के लिए यह अच्छा नहीं होगा भाजपा का घमंड का रवैया त्याग कर जनता के पत्रकारों के हितों और अधिकारों का ख्याल रखना होगा।जिसमें अभी तक तो भाजपा असफल दिखाई दे रही है। अब आगे सत्ताधारी क्या करेगी यह देखने वाली बात है।






