Day: October 24, 2022
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महाराष्ट्र
मेरे पैसे से (जनता के टैक्स ) शहर सजाकर,तुम (आयुक्त) इतना क्यों इतरा रहे हो?
जिस दिए में जले निर्धनों का लहूू,उस दिए का उजाला नहीं चाहिए।लाख गर्मी सताए, लाख ठंडी सताए।ऐसा कंबल दूशाला नहीं…
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जिस दिए में जले निर्धनों का लहूू,उस दिए का उजाला नहीं चाहिए।लाख गर्मी सताए, लाख ठंडी सताए।ऐसा कंबल दूशाला नहीं…
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